Bihar Weather Alert: मानसून में छिपा ‘साइलेंट किलर’! वैज्ञानिकों की चेतावनी—सूखी लू नहीं, अब ‘नम लू’ बन रही सबसे बड़ा खतरा

Bihar Weather Alert: भारत में मानसून को हमेशा गर्मी से राहत देने वाला मौसम माना जाता रहा है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसके एक खतरनाक पहलू को उजागर किया है। नई रिसर्च के अनुसार, मानसून के दौरान “नम लू” यानी अत्यधिक उमस भरी गर्मी लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकती है। यह स्थिति सूखी लू से भी ज्यादा खतरनाक मानी जा रही है और देश की एक अरब से अधिक आबादी इसके प्रभाव में आ सकती है।

वैज्ञानिकों ने खोजा नया मौसम पैटर्न

यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल Climate Dynamics में प्रकाशित हुआ है, जिसमें University of Reading, University of Leeds, UK Met Office और Indian Institute of Tropical Meteorology के वैज्ञानिक शामिल थे।

शोधकर्ताओं ने 1940 से 2023 तक के मौसम आंकड़ों और 261 मानसून घटनाओं का विश्लेषण किया। इससे पता चला कि मानसून के दौरान एक खास तरह का पैटर्न बनता है, जिससे उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में अत्यधिक नमी वाली गर्मी का खतरा 125% तक बढ़ सकता है।

क्यों ज्यादा खतरनाक है ‘नम लू’

वैज्ञानिकों के अनुसार यह खतरा “वेट-बल्ब तापमान” से जुड़ा है। इसमें हवा में नमी इतनी ज्यादा होती है कि शरीर से निकलने वाला पसीना सूख नहीं पाता। ऐसी स्थिति में शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता, जिससे कुछ ही घंटों में हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और दिल से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

रिसर्च के प्रमुख लेखक अक्षय देवरास के अनुसार, लोग आमतौर पर सूखी गर्मी से तो सावधान रहते हैं, लेकिन उमस भरी गर्मी को नजरअंदाज कर देते हैं—जबकि यह ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है।

इन इलाकों में सबसे ज्यादा असर

अध्ययन के मुताबिक, जब मानसून सक्रिय रहता है, तब उत्तर प्रदेश और बिहार के गंगा के मैदानी इलाकों में इसका खतरा सबसे ज्यादा होता है। वहीं, मानसून कमजोर होने पर यह असर दक्षिण भारत और तटीय क्षेत्रों की ओर बढ़ जाता है। यानी यह खतरा देश के बड़े हिस्से को प्रभावित कर सकता है।

4 हफ्ते पहले मिल सकता है अलर्ट

इस रिसर्च की सबसे अहम बात यह है कि अब इस तरह की खतरनाक स्थिति का अनुमान करीब 4 हफ्ते पहले लगाया जा सकता है।

इससे सरकार और प्रशासन को तैयारी का समय मिल सकता है—जैसे अस्पतालों में स्टाफ बढ़ाना, बिजली की मांग को मैनेज करना और स्कूल या काम के समय में बदलाव करना।

आसान भाषा में समझाने की पहल

यह अध्ययन “Simplifying Science” नामक कार्यक्रम के तहत किया गया है, जिसे असर सोशल इम्पैक्ट एडवाइजर्स द्वारा तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और उसके खतरों को आम लोगों तक सरल भाषा में पहुंचाना है, ताकि लोग समय रहते सतर्क हो सकें।

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