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एक साल से अधिक समय से चल रहे अपने आंदोलन को संयुक्त किसान मोर्चा ने स्थगित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि किसान 11 दिसंबर से दिल्ली की सीमाओं पर विरोध स्थलों से घर लौटने लगेंगे। यह घोषणा एसकेएम को केंद्र सरकार से एक आधिकारिक पत्र मिलने के बाद हुई। इस पत्र में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस मामलों को बिना शर्त वापस लेने सहित किसानों की लंबित मांगों को स्वीकार किया गया है।

किसान नेताओं ने कहा कि वे 15 जनवरी को बैठक करेंगे कि क्या सरकार ने मांगों को पूरा किया है या नहीं। किसान नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि यह आंदोलन का अंत नहीं है। सरकार ने किसानों को यह भी आश्वासन दिया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर एक समिति बनाई जाएगी जिसमें एसकेएम के सदस्य भी शामिल होंगे।

एसकेएम कोर कमेटी के सदस्य बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि यह अंत नहीं है क्योंकि आंदोलन अभी केवल स्थगित हुआ है। हमने 15 जनवरी को फिर से बैठक करने का फैसला किया है। मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों ने तीन विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले साल 26 नवंबर को दिल्ली के सीमा बिंदुओं-सिंघू, टिकरी और गाजीपुर में विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।

संसद ने 29 नवंबर को इन कानूनों को निरस्त कर दिया था, लेकिन किसानों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। एसकेएम के एक अन्य सदस्य गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि यह देखने के लिए कि क्या सरकार ने सभी मांगों को पूरा किया है। इसके लिए 15 जनवरी को एक समीक्षा बैठक बुलाई जाएगी। अगर ऐसा नहीं होता है, तो हम विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू करने का निर्णय कर सकते हैं।

किसान नेताओं ने यह भी कहा कि किसान 11 दिसंबर को अपने-अपने स्थानों पर विजय मार्च निकालेंगे। केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने किसान यूनियन के प्रदर्शन स्थगित करने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे भारतीय जनता पार्टी को केंद्र तथा राज्य दोनों में पार्टी की सरकारों द्वारा किए गए कामों को लेकर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए अपना एजेंडा तय करने में मदद मिलेगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से भाजपा के प्रमुख जाट चेहरे बालियान ने कहा कि पार्टी की स्थिति में और सुधार होगा क्योंकि किसान नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यों से संतुष्ट होकर घर लौट रहे हैं।

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