Fri. Jun 14th, 2024

नई दिल्ली: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) सुप्रीमो शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम करने के तरीके की तारीफ की उन्होंने कहा कि उनका स्वभाव ऐसा है कि जब वह किसी काम को हाथ में लेते हैं, तो वह यह सुनिश्चित करते हैं कि काम अपने मुकाम तक पहुंच जाए। इसके साथ ही उन्होंने इस बात की ओर भी इशारा किया कि वर्ष 2004 से 2014 के दौरान यूपीए के शासनकाल में नरेंद्र मोदी के खिलाफ बदले की राजनीतिक करने की कोशिश हुई थी। उन्होंने कहा कि मैंने उनके खिलाफ प्रतिशोध की राजनीति का हमेशा विरोध किया, लेकिन यूपीए गठबंधन के कुछ लोगों ने गुजरात सरकार के कुछ लोगों के खिलाफ कठोर कदम उठाए।

मनमोहन सरकार के दौरान किया था मोदी के खिलाफ बदले की कार्रवाई का विरोध
पुणे में बुधवार को एक कार्यक्रम में पवार ने कहा कि मेरे साथ तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह उस समय गुजरात के सीएम रहे नरेंद्र मोदी के खिलाफ किसी भी तरह के बदले की कार्रवाई का विरोध किया था। पवार ने यह भी कहा कि यूपीए सरकार में उनके अलावा ऐसा कोई नहीं था, जो उस समय मोदी से बात कर सकता था क्योंकि वह लगातार मनमोहन सरकार पर हमला बोलते रहे थे। 2004 से 2014 तक यूपीए सरकार में शरद पवार कृषि मंत्री थे।

पीएम मोदी के कार्य करने के तरीके से प्रभावित है पवार
मोदी के काम करने के तरीके की तारीफ करते हुए पवार ने यह भी कहा कि वह एक बार कोई काम शुरू करते हैं तो उसे पूरा करते हैं। पवार ने कहा, ‘उनका स्वभाव ऐसा है कि एक बार जब वह किसी भी कार्य को हाथ में ले लेते हैं, तो वह यह सुनिश्चित कर लेते हैं कि जब तक वह (कार्य) समाप्त नहीं हो जाता, तब तक वह नहीं रुकेंगे। प्रशासन पर उनकी अच्छी पकड़ है और यही उनका मजबूत पक्ष है।’

‘यूपीए सरकार में मेरे अलावा एक भी ऐसा मंत्री नहीं था, जो मोदी से बात कर सके’
शरद पवार से सवाल किया गया कि ऐसे समय में जब नरेंद्र मोदी सीएम थे और तत्कालीन सरकार के साथ ही केंद्रीय एजेंसियां उनके पीछे थीं, तब क्या आप और मनमोहन सिंह उनके खिलाफ कार्रवाई न किए जाने के पक्ष में थे, इसके जवाब में पवार ने कहा कि यह आंशिक रूप से सत्य है। शरद पवार ने कहा, ‘जब मोदीजी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और मैं केंद्र में था। पीएम जब सभी मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाते थे, तब बीजेपी शासित राज्यों के सीएम की अगुवाई मोदी करते थे और केंद्र पर हमलावर रहते थे। इसलिए ऐसी स्थिति में मोदी से निपटने के लिए रणनीति बनाई जाती थी। यूपीए सरकार में मेरे अलावा एक भी ऐसा मंत्री नहीं था, जो मोदी से बात कर सके।’

मोदी के पद का हमेशा सम्मान किया’
81 वर्षीय पवार ने कहा कि यूपीए की अंदरूनी बैठकों में वह सबको यही समझाते थे कि चाहे उनके और मोदी के बीच या बीजेपी के साथ कितने भी मतभेद हों लेकिन किसी को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह मुख्यमंत्री हैं। पवार ने कहा, ‘मैं बैठकों में कहा करता था कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि वह एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं और लोगों ने उन्हें चुना है। अगर वह यहां कुछ मुद्दों के साथ आ रहे हैं, तो यह हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है कि मतभेदों को दूर किया जाए और उनके राज्यों के लोगों के हितों पर असर न हो।’

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *