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उत्तर प्रदेश और देश की राजनीति में योगी आदित्यनाथ अपनी एक अलग ही छवि कायम कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश की जनता ने उनकी ईमानदार और सख्त प्रशासक की शैली पर एक बार फिर से भरोसा जताया है। योगी दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने जा रहे है। लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया, जब योगी आदित्यनाथ सत्ता सुख छोड़ना चाहते थे। लेकिन वे अपने फैसले को अंजाम तक नहीं पहुंचा सके थे।

एक टीवी कार्यक्रम के दौरान योगी ने किया था खुलासा

योगी आदित्यनाथ ने खुद इस बात का खुलासा एक निजी समाचार चैलन से बातचीत के दौरान किया। उन्होंने बताया कि एक साल में ही उनका राजनीति से मन ऊब गया था। राजनीति में आने और लोगों के लिए काम करने के सवाल पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वो 1998 में पहली बार गोरखपुर से सांसद चुने गए थे। एक साल तक राजनीति में रहने और काम करने के अनुभव के बाद राजनीति छोड़ने का फैसला कर लिया था। 1999 में योगी आदित्यनाथ ने अपने गुरु से राजनीति छोड़ने की बात कही। लेकिन गुरु ने उन्हें सलाह दी।

अटल बिहारी सरकार गिरने से दुखी थे योगी

गोरखनाथ मठ में योगी आदित्यनाथ गायों के चारे और भंडारे के अनाज की व्यवस्था करते थे। 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार एक वोट से गिर गई। इसके बाद योगी आदित्यनाथ ने अपने गुरु से प्रार्थना की थी कि वो चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा था कि राजनीति में मुद्दों की बात नहीं होती है। लोग झूठ बोलते हैं, लेकिन गुरु ने योगी आदित्यनाथ को बिना किसी स्वार्थ के राजनीति में काम करने की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने 1999 में चुनाव लड़ा और लोकसभा में भी पहुंचे थे। योगी आदित्यनाथ गोरखपुर लोकसभा सीट से चार बार सांसद रह चुके हैं,मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें ये सीट छोड़नी पड़ी। योगी के सीएम बनने के बाद खाली हुई गोरखपुर सीट से मशहूर ​अभिनेता रविकिशन भाजपा के सांसद हैं।

राम मंदिर आंदोलन से की राजनीति में एंट्री

1992 में राम मंदिर आंदोलन की तैयारियों को लेकर एबीवीपी की सभा में अजय सिंह ने भाग लिया। इस सभा में महंत अवैद्यनाथ भी आए हुए थे। उन्होंने अजय सिंह को देखते ही उनके भविष्य को भांप लिया। अजय सिंह महंत अवैद्यनाथ से इतना प्रभावित हुए कि उनके सानिध्य में जीवन गुजारने का मन बना लिया। सभा के बाद अजय सिंह अपने घर तो लौट गए लेकिन घर में ज्यादा दिन तक रुक नहीं पाए। अजय ​ने अपनी मां को गोरखपुर जाने की बात कहते हुए घर छोड़ दिया।

अजय सिंह से बने योगी आदित्यनाथ

अजय सिंह जब गोरखपुर पहुंचे और महंत अवैद्यनाथ से मिले तो सन्यासी बनने की इच्छा जताई। गुरु अवैद्यनाथ ने अजय सिंह को दीक्षा देकर अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ बना दिया। योगी आदित्यनाथ आश्रम में ही रहने लगे। जब छह महीने बाद भी अजय सिंह अपने घर वापस नहीं लौटे तो मां ने पिता को गोरखपुर बेटे का पता लगाने भेजा।

बेटे को योगी भेष में देख चौंक गए पिता

अजय के पिता जब पूछताछ करते हुए महंत अवैद्यनाथ के आश्रम पहुंचे तो बेटे को योगी भेष धारण किए देख चकित रह गए। उन्होंने बेटे से घर वापस चलने के लिए कहा लेकिन योगी बन चुके अजय ने मना कर दिया। गुरु अवैद्यनाथ ने अजय के पिता को चार में से एक बेटे को समाजसेवा के लिए देने के लिए मना लिया। योगी को महंत अवैद्यनाथ ने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। 12 सितंबर 2014 को अवैद्यनाथ के ब्रह्मलीन होने के बाद योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मठ की जिम्मेदारी ली।

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