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लगातार दूसरी बार उत्तर प्रदेश की कमान संभालने जा रहे योगी आदित्यनाथ के 2017 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने की कहानी भी दिलचस्प है। योगी को खुद इस बात की भनक तक नहीं थी कि वो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने वाले हैं। जब भाजपा के स्टार प्रचारक के तौर पर 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ घूम-घूम पार्टी के लिए प्रचार कर रहे थे, तो उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि वो इस चुनाव के बाद सीएम बनने वाले हैं।

योगी के सीएम बनने की हकीकत

2017 में भाजपा को उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहुमत मिला था, ऐसे में मुख्यमंत्री के भी कई दावेदार सामने आ रहे थे। ऐसे में योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कैसे बन गए। योगी आदित्यनाथ खुद इस बात को स्वीकारते हैं कि उन्हें भी ये नहीं मालूम था कि उनको मुख्यमंत्री बनना है।

11 फरवरी, 2017 को उत्तर प्रदेश में वोटिंग शुरू हो गई थी। इसी बीच 25-26 फरवरी के आस-पास तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उस वक्त के गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ को फोन किया।
सुषमा स्वराज ने योगी को बताया कि आपको एक पार्लियामेंट्री डेलीगेशन का हिस्सा बनकर विदेश जाना है। इस बात पर योगी आदित्यनाथ ने सुषमा स्वराज से असहमति जताते हुए कहा कि 8 मार्च तक चुनाव होने वाले हैं, 6 मार्च तक उनका चुनावी कार्यक्रम है।

इस बात पर सुषमा स्वराज ने कहा कि 6 तारीख के बाद ही जाना होगा, आप अपनी सहमति दे दीजिए और आप उसको लीड करिए। इसी बीच 8 मार्च को योगी आदित्यनाथ दिल्ली पहुंचते हैं। उनका पासपोर्ट पहले ही जा चुका था।

पीएमओ ने वापस किया योगी का पासपोर्ट

10 मार्च वो तारीख थी जब यूपी चुनाव के नतीजे नहीं आए थे, योगी आदित्यनाथ को शायद ये पहला इशारा था कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। 10 मार्च, 2017 दिन था शुक्रवार इस दिन योगी आदित्यनाथ को पता चला कि उनका पासपोर्ट पीएमओ ने वापस कर दिया है और उन्हें नहीं जाना है।

मतगणना के दिन दिल्ली से गोरखपुर वापस आये योगी

11 मार्च को मतगणना थी, इसी बीच योगी आदित्यनाथ दिल्ली से वापस गोरखपुर चले गए। इस दौरान सुषमा स्वराज ने योगी आदित्यनाथ को फोन किया और कहा कि प्रधानमंत्री जी ने आपका पासपोर्ट वापस किया है। उनका कहना है कि चुनावी मतगणना है और योगी जी का यहां रहना आवश्यक है।

2017 में भाजपा ने जीती थी 312 सीटें

सुषमा स्वराज की बातें योगी आदित्यनाथ के लिए दूसरा इशारा था कि खुद प्रधानमंत्री मोदी के लिए योगी एक योग्य उम्मीदवार हैं। 384 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली भाजपा ने अकेले 312 सीटों पर जीत हासिल की। जबकि NDA को 325 सीटों पर ऐतिहासिक विजय प्राप्त हुई।

पार्लियामेंट्री पार्टी की बैठक में अमित शाह से हुई मुलाकात

होली मनाकर योगी आदित्यनाथ 16 मार्च 2017 को दिल्ली गए। पार्लियामेंट्री पार्टी की बैठक में उन्होंने हिस्सा लिया। संसदीय दल की बैठक में योगी की मुलाकात तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से हुई। अमित शाह ने योगी से पूछा कि आप कब आए हैं? योगी ने बताया कि मैं आज ही आया हूं। इतने में अमित शाह ने योगी से कहा कि आपसे बात करनी हैं। योगी ने उनसे मुलाकात की, इस मुलाकात में अमित शाह ने सामान्य बातचीत की। जाते-जाते अमित शाह ने योगी आदित्यनाथ से एक जरूरी बात कही। अमित शाह ने कहा कि आप दिल्ली छोड़ कर मत जाइएगा। निश्चित तौर पर योगी के लिए अमित शाह की ओर से ये एक बड़ा संकेत था।

शाह की दिल्ली न छोड़ने की बात को न मानते हुए वापस गोरखपुर आये योगी

17 मार्च, 2017 योगी आदित्यनाथ के जीवन की सबसे यादगार तारीख है। दोपहर की फ्लाइट पकड़ कर योगी दिल्ली से गोरखपुर जा चुके थे। इसी दिन शाम में अमित शाह ने योगी को फोन किया और पूछा कि आप कहां हैं? योगी आदित्यनाथ ने हिचकिचाते हुए जवाब दिया कि मैं तो गोरखपुर आ गया हूं। अमित शाह ने झट से पूछा कि मैंने आपको दिल्ली रहने को कहा था तो आप गोरखपुर क्यों चले गए। योगी ने अमित शाह को जवाब दिया कि मेरा वहां कोई कार्य नहीं था तो मैं चला आया।

शाह ने भेजा योगी के लिए चार्टर प्लेन

अमित शाह ने योगी को तुरंत दिल्ली आने को कहा। शाम के तकरीबन 6 बज रहे थे, उस वक्त कोई फ्लाइट या ट्रेन नहीं थी। ये समस्या उन्होंने अमित शाह को बताई। अमित शाह ने योगी से कहा कि कुछ मत करो, कल सुबह मैं एक चार्टर प्लेन भेज रहा हूं, उसी से दिल्ली चले आना। ये बात किसी को बताइएगा मत। योगी अगले दिन दिल्ली पहुंच गए।

19 मार्च 2017 को बने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री

दिल्ली में तकरीबन सुबह 11 बजे के आस पास योगी ने अमित शाह से मुलाकात की। इसके बात अमित शाह ने योगी को कहा कि इसी फ्लाइट को लेकर आप सीधे लखनऊ चले जाइए। शाम को 4 बजे आपको विधायक दल का नेता चुना जाना है और कल शपथ लेनी है। 19 मार्च को योगी आदित्यनाथ देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

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